Commodity Market Research Report

किसान भाईयो नमस्कार आपके लिए प्रस्तुत है कमोडिटी मार्किट रिसर्च रिपोर्ट Commodity Market Research Report दिनांक 9 अगस्त 2022 और इस रिपोर्ट में मक्का दलहन और सरसों के बारे में सर्वे के नतीजे हैं। इस रिपोर्ट में हमने मक्का , दलहन जिसमें मूंग, तुअर, काबली चना, देसी चना , मटर आदि शामिल हैं और इसके साथ सरसों की मार्किट सर्वे रिपोर्ट भी शामिल की है।

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मक्का Commodity Market Research Report

देश में मक्का का सीजन प्रारंभ होने के लिए लगभग 2 महीने का समय बाकी है और माल का स्टॉक तेज गति से कम हो रहा है तथा अक्टूबर अंत तक सूखे माल की कमी रहेगी, क्योंकि फसल कटाई के बाद माल में नमी अधिक रहती है, जिससे पोलट्री उद्योग को नवंबर अंत तक सूखे माल की आवश्यकता रहती है, ऐसी स्थिति में आगामी दो महीने तक मक्का के मूल्यों में कमी नहीं आयेगी ।

भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने जाकारी देते हुए बताया है कि वर्तमान खरीफ सीजन के लिए देश में 5 अगस्त तक मक्का की बुवाई पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ी काम हुई है जिसके आंकड़े इस प्रकार हैं

पिछले वर्ष की बुवाई 76 लाख 34 हजार हेक्टर

इस वर्ष की बुवाई 75 लाख 75 हजार हेक्टर में हुई है

जिसमें तेलंगाना में 3 अगस्त तक बुवाई पिछले वर्ष के 5 लाख 76 हजार 160 एकड़ के मुकाबले घटकर लाख 21 हजार 205 एकड़

गुजरात और राजस्थान में बुआई का रकबा बढ़ा है

गुजरात में 1 अगस्त तक बुवाई 2 लाख 87 हजार 411 हेक्टर के मुकाबले 2 लाख 81 हजार 900 हेक्टर एवं राजस्थान में बुवाई पिछले वर्ष के 7 लाख 84 हजार 320 हेक्टर के मुकाबले बढ़कर 9 लाख 32 हजार 780 हेक्टर में हो चुकी है।

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दलहन Commodity Market Research Report

देसी चना – शीघ्र तेजी संभव है

राजस्थान, महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश की मंडियों में देसी चने की आवक पूरी तरह घट गई है क्यूंकि किसानों के पास अब बेचने को चना नहीं बचा है अब सिर्फ केवल स्टाक के माल कारोबारी ही अपना स्टॉक बेच रहे हैं। पिछले सप्ताह चने के भाव 150 रुपए बेशक बढे लेकिन कारोबार में सुस्ती ही दिखाई दी

सरकार के पास देसी चने का स्टॉक ज्यादा पड़ा है, अकोला – जलगांव लाइन से पड़ते ऊंचे हो गए हैं। इंदौर लाइन में भी बाजार तेज है, जिससे मध्यप्रदेश का देशी एवं पीला चना वहीं बिक रहा है।

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तुवर-200/300 रुपए जल्दी और बढ़ेंगे

तुवर की घरेलू फसल दिसंबर-जनवरी से पहले कोई आने वाली नहीं है। रंगून से भी हाजिर सौदे करने पर ऊंचे पड़ते का ही माल मिल रहा है। सूडान – नाइजीरिया के सस्ते माल का आयात होता था, वह माल आने नहीं हैं। अकोला जलगांव लाइन के हल्के माल काफी निबट गए हैं। बढ़िया माल के भाव गत सप्ताह में 250 रुपए बढ़ गये हैं, जिससे रंगूनी तूवर अभी 200 रुपए बढ़ाकर बोली गई, इन परिस्थितियों बाजार तेज ही लग रहा है।

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काबली चना-माल की कमी से फिर बढ़ेगा

गत सप्ताह काबली चने में तेजी के बाद वर्तमान में 200 बाजार सुस्त हो गया है, लेकिन हाजिर माल की कमी महाराष्ट्र की मंडियों में बनी हुई है, जिससे जो कम भाव के माल आकर बिक रहे थे, वह ज्यादा नहीं आ रहे हैं। इधर मध्य प्रदेश का मोटा चना कम आ रहा है, क्योंकि इंदौर एवं भोपाल दोनों ही मंडियां ऊंची बिक रही हैं, इन परिस्थितियों में काबुली चने के व्यापार में रिस्क नहीं है। ग्रेन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र का काबली चना बढ़िया माल 7900 रुपए बोल रहे हैं, जो ऊपर में 8100 रुपए पिछले सप्ताह बिक गया था। अत: भारी तेजी के बाद थोड़ा करेक्शन जरूरी था, इसके बाद फिर बाजार तेज हो जाएगा।

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उड़द- फिर बढ़ने के आसार

उड़द में लिवाली से एक पखवाड़े से अच्छी रही, जिसके चलते बाजार 500 रुपए बढ़कर 8900 तक बोलने लगे थे, लेकिन बाद में मुनाफावसूली बिकवाली से 8700 एसक्यू क्वालिटी के भाव रह गए, उसके बाद बिकवाली कमजोर होने से आज ग्राहकी अच्छी देखी गई। छोटे माल भी ज्यादा बिकने लगे हैं, नई फसल कोई आने वाली नहीं है आने वाले दिनों में उड़द का बाजार तेज रहेगा।

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मूंग- अब बाजार रुक कर बढ़ेगा

गत सप्ताह प्रयागराज – कानपुर लाइन के मूंग कम मात्रा में आने की खबर थी, जिससे 300/400 रुपए बढ़कर क्वालिटी अनुसार 6200 से 6700 रुपए प्रति क्विंटल के बीच बिक रही है। वास्तविकता यह है कि विदेशों से कोई माल आने वाले नहीं है, यूपी के अलावा बिहार-झारखंड के भी माल आ रहे हैं, अब बढ़े भाव पर थोड़ा ठहराव के बाद बाजार फिर बढ़ जाएगा, क्योंकि उत्पादक मंडिया तेज चल रही हैं। दाल मिलों में और कोई दूसरा माल नहीं है, राजस्थान – महाराष्ट्र की फसल आने में अभी 2 महीने का समय लगेगा।

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मटर- व्यापार में कोई रिस्क नहीं

मटर में मौसम खराब होने तथा हल्के माल की बिकवाली आने से दो दिन में थोड़ी खामोशी जरूर रही। उधर विदेशी मटर का आयात भी बंद है तथा उत्पादक मंडियों में भी आवक घटने लगी है, जिससे वर्तमान भाव की मटर में अब घटने की गुंजाइश नहीं है। हरियाणा-पंजाब, जम्मू कश्मीर एवं राजस्थान की मांग निकलने लगी है। यही कारण है कि अब इसमें कभी भी बाजार 400/500 रुपए बढ़ सकता है।

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सरसों Commodity Market Research Report


बीते सप्ताह के दोरान सरसों में 125 रुपये कुन्टल की गिरावट दर्ज हुआ, विदेशी बाजारों से कमजोरी के संकेतों से सरसो में बीते सप्ताह गिरावट दर्ज की गयी वहीं कच्ची घानी में 1.5 से 2 रुपए किलो की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गयी सरसो का फंडामेंटल फ़िलहाल ना तेजी और ना ही मंदी का है लेकिन आयातित तेलों में दबाव से सरसो और सरसो तेल को भी अपने छपे में लिया है एक्सपर्ट्स का मानना है की स्टॉक 40 लाख टन के आस पास ही रह गया है ऊँची कीमतें मिलने की उम्मीद में स्टॉकिस्ट और किसान अब तक स्टॉक होल्ड करके चल रहे हैं।

Conclusion

यह रिपोर्ट विभिन्न सरकारी गैर सरकारी वेब साइट्स, मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर बनाई गयी है। यह केवल आपकी जानकारी हेतु है कोई भी व्यापारिक सौदा करने से पूर्व अपनी जानकारियों की पुष्टि मंडी समिति से अवश्य कर लेवें।

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Reference

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