किसानों के हित में बीमा कंपनियों को बदलने होंगे नियम

फसल बीमा में Common Service Center की साइलेंट क्रांति!

प्रधानमंत्री फसल बीमा के लिए अधिकृत की गई कंपनियों को किसानों के हित मे कुछ नियमों में बदलाव की जरूरत है। वो कौन से जरूरी बदलाव हैं, इन पर चर्चा से पूर्व गैर ऋणी किसानों के जीवन को किस तरह Common Service Center सेंटर बदल रहे हैं। इस पर विस्तार से चर्चा करना जरूरी है। क्योंकि ग्रामीण परिवेश के लोगों के साथ जिस तरह का बर्ताव सरकारी बाबू करते हैं, ऐसे में उनके लिए Common Service Center को संचालित करने वाले लोकल युवा किसानों एवं आमजन के लिए सरकारी योजनाओं एवं सरकारी दस्तावेजों के लिए सबसे मुफीद जगह ये सेंटर बनते जा रहे हैं।

सीएससी को अन्य सरकारी कामों के अलावा फसल बीमा के इच्छुक सभी गैर ऋणी किसानों की फसलों का बीमा प्रीमियम भरने, किसानों का विवरण भारत सरकार के फसल बीमा पोर्टल पर अपलोड करने का काम दिया गया है। सभी सीएससी वीएलई मौसम सत्र में बीमित फसल के किसानों का रिकॉर्ड में मोबाईल न. आवश्यक रूप से मेंशन (सन्धारित) करना जरूरी है। सभी सीएससी पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित फलैक्स/ बैनर जिसमें क्षेत्र में अधिसूचित फसलों, प्रीमियम राशि एवं विभाग द्वारा फसल बीमा कराये जाने के लिये आवश्यक दस्तावेजों का उल्लेख एवं प्रदर्शित करना जरूरी है। किसान का विवरण राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर अंकित करते समय ये आवश्यक दस्तावेज संलग्न करके सबमिट करने होंगे।

  • बीमा कम्पनी से किसान की फसल बीमा पॉलिसी के संबंध में रिर्वट प्राप्त होने के उपरान्त संबंधित किसान से सम्पर्क कर वांछित दस्तावेज निर्धारित अवधि में ही अपलोड करेगें।
  • गैर ऋणी किसान द्वारा प्रस्तुत किए गए निम्न दस्तावेजों को स्कैन कर अपलोड करना अनिवार्य होगा, जिनके अभाव में बीमा प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं होगा (सभी दस्तावेज स्पष्ट रूप से पठनीय होने चाहिए)
  • बीमा हेतु प्रस्तावित क्षेत्रफल में बोई गई / बोई जाने वाली फसल के खसरा नम्बरों की स्व प्रमाणित (Self Attested) नवीनतम जमाबन्दी की नकल जमा करवानी होगी।
  • एक स्व-प्रमाणित (Self Attested) घोषणा-पत्र जिसमें प्रत्येक खसरा संख्या का कुल क्षेत्र, प्रस्तावित फसल का बुवाई क्षेत्र, मालिक का नाम एवं बीमा हित का प्रकार (स्वयं, परिवार अथवा बंटाई) बताना होगा।
  • बैंक खाते की पास बुक की प्रति
  • भूमि बंटाई पर होने की दशा में निम्न अतिरिक्त दस्तावेज
  • सम्बन्धित खातेदार से प्राप्त शपथ पत्र कि उस खातेदार ने जमीन बंटाई पर दी है(इसमें सम्बन्धित कृषि भूमि का विवरण भी होगा)
    बंटाईदार किसान के राजस्थान का मूल निवासी होने के प्रमाण पत्र की प्रति
  • जिस किसान से बंटाई पर जमीन ली गयी है, उस किसान का तथा जो किसान बीमा करवा रहा है उन दोनों किसानों को स्वयं द्वारा सत्यापित आधार कार्ड की प्रति प्रस्तुत करनी होगी।
  • किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में भारत सरकार द्वारा जारी योजना की परिचालन मार्गदर्शिका ( खरीफ 2020 से लागू) में वर्णित दिशा-निर्देश एवं अपेक्स संस्थाओं के निर्णय सर्वमान्य होंगे।

Mandi Bhav 3 September 2022

हनुमानगढ़ जिले में पीएम फसल बीमा योजना के तहत फसलों के बीमा करने के लिए एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया लिमिटेड को अधिकृत किया गया है। अधिकृत बीमा कम्पनी का पूरा पता-एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया लिमिटेड, उपासना टावर्स, चौथी मंजिल, सी-98, सी स्कीम, जयपुर-302001

सम्पन भारत की पहचान-बीमित फसल खुशहाल किसान

किसानों की भलाई से सम्बंधित यह स्लोगन सरकार द्वारा जारी किया गया है। आज हम फसल बीमा पॉलिसी को लेकर csc सेंटर संचालक जगदीश साहू जी के अनुभवों से किसानों की परेशानियां, कमियों एवं बीमा पॉलिसी व बीमा कंपनियों की कार्यशैली की पड़ताल करेंगे। हनुमानगढ़ जिले की पल्लू तहसील में सीएससी सेंटर संचालक जगदीश साहू जी ने फसल बीमा योजना को लेकर हम से विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने बताया कि गैर ऋणी एवं बटाईदार (जोतदार) किसानों के लिए फसल बीमा योजना चुरू, हनुमानगढ़ एवं बीकानेर जिले के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।

पल्लू तहसील में करीब 25 सीएससी सेंटर सुचारू रूप से चल रहे हैं। हालांकि उन्होंने फसल बीमा योजना में सुधार को लेकर भी सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि फसल बीमा के दस्तावेजी करने की प्रक्रिया में कई बार ज्यादा भीड़ होने के कारण फसल का नाम गलत दर्ज हो जाता है तो उसके सुधार के लिए अंतिम तिथि के बाद 15 दिन का समय दिया जाना चाहिए। दूसरा सुझाव यह है कि ज्यादातर किसान अंतिम तारीख को बीमा करवाने आते हैं, जिसके कारण सीएससी सेंटर पर काम का बोझ बढ़ जाता है। जिसके कारण गलती होने के चांस बढ़ जाते हैं। उन्होंने बीमा कम्पनी को लेकर कहा कि बीमा कम्पनियों को सभी फार्मों एवं दस्तावेजों की जांच प्रीमियम भरने की तारीख के बाद तुरंत शुरू करना चाहिए, जबकि बीमा कंपनियां यह काम तब शुरू करती हैं जब क्रॉप कटिंग यानी बीमा क्लेम की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

8 अगस्त 2022 को दैनिक भास्कर (हनुमानगढ़ भास्कर) में छपी रिपोर्ट के अनुसार-“चूरू सांसद राहुल कस्वां ने लोकसभा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ-2021 के बकाया क्लेम का मुद्दा उठाया। सांसद ने बताया कि चूरू लोकसभा क्षेत्र के नोहर, भादरा व रावतसर में एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमा करने का कार्य करती है। खरीफ-2021 के बीमा भुगतान को लेकर संबंधित बीमा कंपनी ने राज्य सरकार के समक्ष क्रॉप कटिंग डाटा को लेकर आपत्ति दर्ज करवाई है।

चूंकि क्रॉप कटिंग के दौरान पटवारी, कृषि पर्यवेक्षक, बीमा कंपनी के अधिकारी व किसान उपस्थित रहते हैं और इनके हस्ताक्षर होते हैं। बावजूद इसके राज्य सरकार की तकनीकी कमेटी ने बीमा कंपनी की आपत्ति को स्वीकार कर लिया। राज्य सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों और तकनीकी कमेटी ने भारत सरकार से सैटेलाइट आधारित आंकड़े मांगे तो केन्द्र सरकार ने आंकड़े उपलब्ध करवाए। एक तरफ तो राज्य सरकार के कर्मचारी सैटेलाइट आधारित आंकड़े मांगते हैं, वहीं दूसरी तरफ शिकायत करते हैं कि केंद्र ने आंकड़े क्यों दिए।

Origin and Gensis of Javik Setu

इसी प्रकार का मामला चूरू जिले के खरीफ-2021 के फसल बीमा क्लैम को लेकर चल रहा है। राज्य सरकार की तकनीकी कमेटी ने बीमा कंपनी की आपत्तियों को स्वीकार कर उन्हीं की सरकार के कर्मचारियों व बीमा कंपनी के अधिकारियों की उपस्थिति में तैयार की गई क्रॉप कटिंग रिपोर्ट पर प्रश्न चिन्ह लगाने का कार्य किया है। किसानों को खरीफ-21 में बहुत बड़ा नुकसान हुआ, लेकिन आज खरीफ-2022 आने तक भी किसानों को बीमा क्लेम नहीं मिल पाया है। सांसद ने सदन के माध्यम से केन्द्र सरकार से आग्रह किया कि राजस्थान सरकार से रिपोर्ट लें कि कितने पटवार मंडलों में क्रॉप कटिंग रिपोर्ट पर बीमा कंपनी के अधिकारियों के हस्ताक्षर हुए हैं। अगर बीमा कंपनी के अधिकारियों के हस्ताक्षर क्रॉप कटिंग रिपोर्ट पर हुए हैं तो किसानों को बीमा क्लेम सैटेलाइट आधार पर न देकर क्रॉप कटिंग रिपोर्ट के आधार पर दिलवाया जाए।”

प्रधान मंत्री फसल बिमा योजना (PMFBY) के तहत हनुमानगढ़ जिले में खरीफ 2021-22 मौसम के लिए प्रीमियम राशि बीमित राशि एवं अधिसूचित बीमा इकाई का विवरण

  • हनुमानगढ़ जिले की तहसील-भादरा, हनुमानगढ़, नोहर, पीलीबंगा, रावतसर, संगरिया, टिब्बी जिले की सभी तहसीलों में आने वाले सभी गांवों में बाजरा की बीमित राशि प्रति हेक्टेयर 17,149₹ है और इसका 2% प्रीमियम 342.98₹ बनता है, जिसका भुगतान किसान को करना है।
  • मूंग की बीमित राशि प्रति हेक्टेयर 38,589₹ है और इसका 2% प्रीमियम 771.78₹ बनता है, जिसका भुगतान किसान को करना है।
  • मोठ की बीमित राशि प्रति हेक्टेयर 20,935₹ है और इसका 2% प्रीमियम 404.70₹ बनता है, जिसका भुगतान किसान को करना है।
  • ग्वार की बीमित राशि प्रति हेक्टेयर 21675₹ है और इसका 2% प्रीमियम 433.50₹ बनता है, जिसका भुगतान किसान को करना है।
  • कपास की बीमित राशि प्रति हेक्टेयर 32996₹ है और कपास को वाणिज्यिक फसल माना गया है। इसका 5% प्रीमियम 1649.80₹ बनता है, जिसका भुगतान किसान को करना है।
  • तिल की बीमित राशि प्रति हेक्टेयर 21,753₹ है और इसका 2% प्रीमियम 435.06₹ बनता है, जिसका भुगतान किसान को करना है।
  • मूंगफली की बीमित राशि प्रति हेक्टेयर 105025₹ है और इसका 2% प्रीमियम 2100.50₹ बनता है, जिसका भुगतान किसान को करना है।
  • किन्नू की बीमित राशि प्रति हेक्टेयर 8100₹ है और इसका 5% प्रीमियम 4050₹ बनता है, जिसका भुगतान किसान को करना है।

3 सितंबर 2022 को दैनिक भास्कर (श्रीगंगानगर) में छपी खबर के अनुसार-“जिन किसानों ने खरीफ फसलों का बीमा करवाया है वे कमजोर व खराब हुई फसलों को नष्ट नहीं करें। इन फसलों को नष्ट करने वाले किसानों को बीमा क्लेम नहीं मिल पाएगा। कारण कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रावधान अनुसार बीमित फसलों में फसल बीमा क्लेम का आकलन संबंधित पटवार सर्किल में उपज में आई कमी के अनुसार फसल कटाई प्रयोग के आधार पर किया जाता है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत इस वर्ष खरीफ फसलों का जिले में लगभग 95000 कृषकों ने बीमा करवाया है। जिनकी लगभग 292657 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 1712192 बीमा पॉलिसियां सृजित हुई हैं। उक्त पॉलिसियों का वितरण एक सितंबर से शुरू कर दिया गया है। क्षेत्र के कुछ किसान कमजोर व खराब हुई फसलों को नष्ट कर रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले के किसानों से कम पानी, कम/अधिक वर्षा कीट बीमारी एवं अन्य कारणों से कमजोर / खराब हुई फसलों को हल चलाकर नष्ट न करें।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रावधाना के अनुसार बीमित फसलों में फसल बीमा क्लेम का आकलन संबंधित पटवार सर्किल में उपज में आई कमी के अनुसार फसल कटाई प्रयोग के आधार पर ही किया जाता है। अगर कमजोर फसलों को नष्ट कर दिया जाएगा तो अच्छी फसल बचेगी जिससे उपज अधिक होगी। इस कारण उपज का वास्तविक आकलन नहीं हो पाएगा एवं बीमा क्लेम के पात्र किसान बीमा क्लेम से वंचित रह जाएंगे। जिले में राजस्व एवं कृषि विभाग के प्राथमिक कार्यकर्ताओं की ओर से तहसील/पटवार सर्किल स्तर पर फसल कटाई प्रयोगों के सम्पादन का काम शुरू कर दिया गया है ताकि फसलों का सही-सही आंकन हो सके व बीमित कृषकों को वास्तविक बीमा क्लेम मिल सके।

किसानों से की जा रही है अपील, वे फसल नष्ट नहीं करें

जिन किसानों ने फसलों का बीमा करवाया है वे खराब व कमजोर फसलों का नष्ट नहीं करें। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रावधान अनुसार ऐसे किसानों को फसल बीमा क्लेम नहीं मिल जाएगा। किसानों से अपील की जा रही है कि वे कमजोर व खराब हुई फसलों को नष्ट नहीं करें ताकि फसल उपज का सही आकलन हो सके तथा किसानों को बीमा क्लेम मिल सके।

-जीआर मटोरिया, संयुक्त निदेशक कृषि श्रीगंगानगर।”

चुरू के सांसद राहुल कासवां ने कृषि मंत्री को किसानों के रिजेक्ट हुए बीमों से सम्बंधित पत्र लिखा था-

आदरणीय श्री नरेन्द्र सिंह तोमर जी, माननीय कृषि मंत्री, भारत सरकार

दिनांक :- 18/03/2022

मेरे लोकसभा क्षेत्र चुरू में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत SBI जनरल इंश्योरंस कंपनी द्वारा बीमा किया जा रहा है। खरीफ 2021 हेतु जिन किसानों द्वारा CSC या एमित्र के माध्यम से फसल बीमा करवाया था, बीमा कंपनी द्वारा ऐसे लगभग 10 हजार बीमा पालिसी को • डॉक्यूमेंट पुरे नहीं होने के कारण रिजेक्ट कर दिया हैं। जिसकी वजह से क्षेत्र के किसानों को अत्यंत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं।

अतः मेरा आपसे अनुरोध हैं की इस समस्या को देखते हुए CSC को निर्देशित करते हुए रिजेक्ट किये गए किसानों के डॉक्यूमेंट फिर से पोर्टल पर अपलोड करने हेतु व्यवस्था की जावे ताकि क्षेत्र के किसानों को इसका लाभ मिल सकें।

Letter to Sh. Narender Singh Tomar, Agriculture mInister, Govt of India

कृषि आयुक्त सोहन लाल शर्मा ने उपनिदेशक कृषि (विस्तार) को किसानों बीमों के रिजेक्ट होने सम्बन्धी सुधार को लेकर पत्र लिखा-

Letter writtern by Sohan Lal Sharma, Ayukta Krishi, Haryana to DDA Agriculture

उपनिदेशक कृषि (विस्तार)
जिला परिषद चुरू

Dated: 28/03/22

विषय – प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ 2021 में गैर ऋणी कृषकों हेतु सीएससी के माध्यम से सृजित पॉलिसियां दस्तावेजों के अभाव में रिजेक्ट किये जाने बाबत।

प्रसंग : कार्यालय जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट चुरू के पत्रांक 2021-22 / 5222 दिनांक 25.03.2022 के क्रम में।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना मौसम सत्र खरीफ 2021 के लिये प्रासंगिक पत्र के माध्यम से विभाग को अवगत करवाया गया है कि जिले के गैर ऋणी कृषकों हेतु सीएससी के माध्यम से सृजित की गई फसल बीमा पॉलिसियों के सृजन के समय आवश्यक दस्तावेज अपलोड नहीं किये जाने के कारण बीमा कम्पनी द्वारा पॉलिसियों का अनुमोदन नहीं हुआ है।

राजस्थान में फसल बीमा योजना

इस सम्बन्ध में आपको निर्देशित किया जाता है कि दिनांक 30.03.2022 से 05.04.2022 तक जिले में बीमा कम्पनी एवं सीएससी का संयुक्त कैम्प आयोजित करें एवं कैम्प में ऐसे गैर-ऋणी कृषक जिनकी पॉलिसी बीमा कम्पनी द्वारा रिवर्ट की गई है, को दस्तावेजों सहित बुलाकर उनके दस्तावेज सीएससी को प्रदान करावें जिससे की भारत सरकार द्वारा पोर्टल पुनः खोले जाने की स्थिति में दस्तावेज अपलोड किये जा सके। साथ ही कैम्प की प्रगति से कृषि आयुक्तालय को अवगत करावें।

(सोहन लाल शर्मा) आयुक्त कृषि Dated: 28/03/22

रिजेक्ट फसल बीमा पॉलिसी में सुधार के लिए शिविर

दस्तावेजों के अभाव में जिले में रिजेक्ट हुई गैर ऋणी किसानों की पॉलिसी में सुधार के लिए चुरू जिले की सभी पंचायत समितियों में 30 मार्च से 5 अप्रैल तक शिविरों का आयोजन किया गया। ऎसे सभी गैर ऋणी किसानों को वांछित दस्तावेजों सहित संबंधित पंचायत समिति सभागार में आकर पॉलिसी सही करवाने के लिए कहा गया है।

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बीमा पॉलिसी रिजेक्ट या रिवर्ट

जिला कलक्टर सिद्धार्थ सिहाग ने बताया कि जिन गैर ऋणी किसानों की सीएससी के माध्यम से सृजित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की खरीफ 2021 की बीमा पॉलिसी दस्तावेजों के अभाव में रिजेक्ट या रिवर्ट कर दी गई थी, ऎसे किसानों के लिए यह शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सभी गैर-ऋणी किसान अपने मूल दस्तावेज यथा जमाबंदी, आधार कार्ड, बैंक खाते की प्रति के साथ स्वयं उपस्थित होकर अपनी रिवर्ट अथवा रिजेक्ट फसल बीमा पॉलिसी में सुधार करवा सकते हैं। उन्होंने शिविरों में संबंधित किसानों की पॉलिसी में सुधार करने, शिविरों की सूचना संबंधित किसानों तक पहुंचाने के लिए समुचित प्रचार-प्रसार करने के निर्देश कृषि उपनिदेशक, बीमा कंपनी, तहसीलदारों एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को दिए हैं।

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