लांच हुई लार्ज एरिया आर्गेनिक सर्टिफिकेशन स्कीम : देश के किसानों को होगा फायदा

Large Area Certification 2

किसानों के लिए जैविक खेती में प्रमाणीकरण हमेशा से एक बड़ा मसला रहा है | एन.पी.ओ.पी. और पी.जी.एस. कार्यक्रम जिसके तहत जैविक प्रमाणीकरण एजेंसिया जैविक प्रमाणपत्र जारी करती हैं उसमें तीन साल का समय कम से कम लगता है | देश में  बहुत सारे इलाके हैं जहाँ आज तक कभी भी किसी भी रसायन का उपयोग कृषि कार्यों के लिए नहीं किया गया है | ऐसे इलाकों में आज भी परम्परागत तौर तरीकों से किसान खेती करते हैं | भारत सरकार के कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग ने पारंपरिक जैविक क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें प्रमाणित जैविक उत्पादन केन्द्र में बदलने के लिए  ने लार्ज एरिया सर्टिफिकेशन योजना शुरू की है | 

भारत में आज की तारिख में लगभग 30 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र जैविक प्रमाणीकरण के तहत पंजीकृत हैं| अंतर्राष्ट्रीय सर्वेक्षण रिपोर्ट (2021) के अनुसार, जहाँ भारत क्षेत्रफल के मामले में 5वें स्थान पर है जबकि कुल जैविक कृषि उत्पादकों की संख्या (आधार वर्ष 2019) के मामले में शीर्ष पर है।

भारत सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार के कार निकोबार और द्वीपों के समूह नैनकोवरी के 14,491 हेक्टेयर क्षेत्र को जैविक प्रमाणपत्र दिया है। यह क्षेत्र पीजीएस-इंडिया (पार्टिसिपेटरी गारंटी सिस्टम) प्रमाणन कार्यक्रम के लार्ज एरिया सर्टिफिकेशन (एलएसी) योजना के तहत जैविक प्रमाणीकरण से प्रमाणित किए जाने वाला पहला बड़ा क्षेत्र बन गया है।

कार निकोबार और द्वीपों के समूह नैनकोवरी पारंपरिक रूप से जैविक क्षेत्र के रूप में जाने जाते हैं जहाँ किसान आज भी परम्परागत तौर से बिना किसी  उपयोग के खेती करते हैं |  इन इलाकों का  जैविक स्टेटस बरकरार रखने के उद्देश्य से  प्रशासन ने इन द्वीपों में जी.एम.ओ. बीज और  किसी प्रकार के भी रासायनिक खाद और जहर  के स्टॉक , बिक्री, खरीद और उपयोग पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। 

केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन ने स्थानीय समुदायों के सहयोग से किसानों का एक डेटाबेस तैयार किया है जिसमें भूमि स्वामित्व, काम करने के तरीके और बीते समय में अपनाई गई पद्धति आदि के आंकड़े एकत्र किये गए हैं | 

पी.जी.एस. इंडिया की एक विशेषज्ञ समिति ने पूरे इलाके की जैविक स्थिति का सत्यापन किया है और पीजीएस-इंडिया सर्टिफिकेट स्कीम के तहत क्षेत्र को जैविक प्रमाण देने की सिफारिश की है। इन रिपोर्टों के आधार पर, भारत सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कार निकोबार और द्वीपों के समूह नैनकोवरी के 14,491 हेक्टेयर क्षेत्र को जैविक प्रमाण पत्र दिया है।

पढ़ें : न्यूनतम समर्थन मूल्य पर जारी हैं फसलों की खरीद 26अप्रैल 2021 तक गेहूं के 22,20,665 किसानों को जारी हुए 43,916 करोड़ 20 लाख रुपये

देश के अन्य क्षेत्रों में भी लागू होगी यह योजना 
इस योजना का लाभ हिमाचल प्रदेश,उत्तराखंड,उत्तर पूर्वी राज्यों और झारखंड और छत्तीसगढ़ के आदिवासी बेल्ट, राजस्थान के रेगिस्तानी जिलों के किसानों को भी दिया जाएगा | 

जैविक उत्पादों की मार्केटिंग में मिल रही है मदद  

जैविक प्रमाणीकरण मिल जाने के कारण जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग और लेबलिंग की सुविधा मिल जाने से मार्केटिंग आसान हो गयी है |

परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत चल रहा है काम  

देश में जैविक किसानों को प्रमाणित जैविक श्रेणी में लाने के लिए भारत सरकार के कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग ने पी.के.वी.वाई. (परम्परागत कृषि विकास योजना) के तहत एक जैविक प्रमाणीकरण सहायता योजना शुरू की है। इस योजना के तहत, व्यक्तिगत किसान एनपीओपी या पीजीएस-इंडिया के किसी भी प्रचलित प्रमाणन प्रणाली के तहत प्रमाणीकरण के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं। राज्यों के माध्यम से प्रमाणन एजेंसियों को सीधे प्रमाणन लागत के भुगतान के रूप में सहायता उपलब्ध होगी।

रूटीन में जैविक  प्रमाण पत्र मिलने में जाता है तीन वर्षों का समय 

जैविक उत्पादन के मानक नियम के तहत, रासायनिक इस्तेमाल वाले क्षेत्रों को जैविक प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 2-3 वर्षों के समय लग जाता है। इस अवधि के दौरान, किसानों को मानक जैविक कृषि मानकों को अपनाने और प्रमाणन प्रक्रिया के तहत अपने खेतों को रख-रखाव करना होता है।

सफलता पूर्वक समापन होने पर, ऐसे खेतों को 2-3 वर्षों के बाद जैविक के रूप में प्रमाणित किया जा सकता है। प्रमाणन प्रक्रिया को प्रमाणीकरण अधिकारियों द्वारा विस्तृत डोक्यूमेंटेशन और समय-समय पर सत्यापन की भी आवश्यकता होती है|

जबकि लार्ज एरिया सर्टिफिकेशन स्कीम के तहत आवश्यकताएं सरल हैं और क्षेत्र को लगभग तुरंत प्रमाणित किया जा सकता है। एल.ए.सी. एक त्वरित प्रमाणन प्रक्रिया है जो कम लागत वाली है और किसानों को पी.जी.एस. जैविक प्रमाणित उत्पादों के विपणन के लिए 2-3 साल तक इंतजार नहीं करना पड़ता है।

लार्ज एरिया सर्टिफिकेशन स्कीम कैसे काम करती है 

एल.ए.सी.के तहत, क्षेत्र में आने वाली  प्रत्येक गांव को एक क्लस्टर/ग्रुप के रूप संयोजित किया जाता है। गांव के आधार  पर दस्तावेज एक फॉरमेट एकत्र किये जाते हैं। इलाके के सभी खेती करने वाले  और पशुधन वाले सभी किसानों को मानक आवश्यकताओं का पालन करना होता है| पी.जी.एस-इंडिया के अनुसार मूल्यांकन की एक प्रक्रिया द्वारा वार्षिक सत्यापन के माध्यम से वार्षिक आधार पर प्रमाणन का नवीनीकरण किया जाता है| 

Leave a Comment