सपनों से हकीकत का सफ़र आज एक पड़ाव पर ठहर गया है, बहुत याद आयेंगे ओम प्रकाश मांझू जी

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करोना काल में अब हाल यह हो गया है कि सोशल मीडिया में अनायास ही किसी अपने का फोटो नज़र आ जाता है तो कलेजा हलक में आ जाता है और जब तक पोस्ट पढ़ी जाती है तब तक मन और मस्तिष्क में बवंडर बना रहता है |आज सुबह हरियासर वाले विजय भाई ने जैसे ही हकीकत संस्थान के चेयरमैन श्रीमान ओम प्रकाश मांझू जी के असमय निधन की सूचना पोस्ट की तो बस मेरा तो पहले से फ्यूज बल्ब और ज्यादा बुझ गया | पिछले हफ्ते मेरी बुआ जी के बेटे सुभाष भाई साहब , फिर मनु पिलानिया भाई और आज ओम प्रकाश जी |

क्या करें ? भाई जाना सभी ने है एक ना एक दिन लेकिन अब जी हालात बन रहे हैं उसमें अपनों को ऐसे बिछड़ता देख कर दिल छलनी हुआ जाता है | ओम प्रकाश मांझू जी से मेरी कोई निजी मुलाकात नही थी बस एक बार साल 2019 की जून में जब मैं शोधयात्रा में था तो वो अपनी पूरी टीम के साथ कृषि विज्ञान केंद्र लूणकरणसर में मिलने आये थे जहाँ पर शोधयात्री दोपहर का विश्राम कर रहे थे |

लेकिन एक छोटी सी मुलाकात में मेरा परिचय हकीकत से हुआ | हकीकत यानि हमारा अपना कुदरती खेती संस्थान | जिसे ओम प्रकाश मांझू जी ने सपने से हकीकत में बदला था | हकीकत संस्था की शुरुआत ओम प्रकाश जी ने अपने सरकारी नौकरी से रिटायरमेंट के बाद की थी | संस्था शुरू करने के पीछे जो सोच थी वो यह कि जैविक किसान अपने उत्पादों को लेकर इधर उधर भटकते रहते हैं और ज्यादतर किसान हताश होकर घर बैठ जाते हैं |

ओम प्रकाश जी यदि चाहते हो अपने रिटायरमेंट बेनेफिट्स को आराम से घर में बैठ कर एन्जॉय करते लेकिन इस किसानपुत्र ने तो जैसे सब कुछ पहले से ही प्लान किया हुआ था | हनुमानगढ़ और आसपास के इलाके के किसानों को संगठित करके कुदरती खेती की ओर सभी मोड़ना शुरू किया और लाइक माइंडेड किसानों ने मिलकर हकीकत संस्था की नींव रख दी |

हनुमानगढ़ की अनाजमंडी में एक दूकान लेकर वहां रिटेल स्टोर खोला गया और एक दूकान का एक FSSAI नम्बर , एक जी.एस.टी और सिंगल बिलिंग सिस्टम लेकिन बैकएंड में बहुत सारे किसानों की सप्लाई | यह मॉडल मुझे इतना पसंद आया था कि मैंने किसान कम्पनी बनाने वाले सभी इच्छुक किसानों को हकीकत मॉडल के बारे में बताना शुरू किया |

मैं अपनी शोध यात्रा में हरियासर के किसान विजय भाई गोदारा जी से भी मिला था जिनका खेत हनुमानगढ़ से तीन घंटे की दूरी पर स्थित है लेकिन हर रोज दोपहर को 1 बजे फार्म गेट पर एक बस रूकती है जिसमें वो ताज़ी सब्जियां रख देते हैं और वो बस चार बजे हनुमानगढ़ में हकीकत स्टोर पर सब्जियां छोड़ देती है जहाँ ग्राहक पहले से ही इंतज़ार में होते हैं कि कहीं हम मिस ना हो जाएँ |

ओम प्रकाश जी ने अपने अनुभव से जो व्यवस्था बनाई है उसने मेरे मन पर बहुत गहरा असर किया है | मैंने हकीकत मॉडल को समझने के लिए इसके सदस्य किसानों से कई दौर बातचीत की और हमेशा मैंने सभी सदस्यों की कार्य प्रणाली में ओम प्रकाश जी की दक्ष कार्ययोजना को महसूस किया है|

हकीकत संस्थान को जब किसान कम्पनी में बदलने की बात चली तो मैं शुरुआत में अड़ियल था क्यूंकि मुझे उनके द्वारा स्थापित मॉडल से कुछ भी बेहतर नही नज़र आ रहा था लेकिन ओम प्रकाश जी ने मुझे अपने अनुभव से एक बड़ी संभावना और तस्वीर का एहसास करवाया और मैं बतौर सेवादार उनके अभियान में शामिल हो गया |

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ओम प्रकाश जी ने मेरी ड्यूटी लगाईं की हकीकत के सदस्य किसानों के अनेकों अनेक सवाल हैं कम्पनी लॉ , कम्पनी के स्वरुप , सदस्यों के आपसी लेन देन व्यवहार के बारे में, उन सभी सवालों के जवाब अपने अनुभव के आधार पर सांझे करने हैं | हालाँकि ओम प्रकाश जी का मन तो रूबरू बैठक करने का था और मैं भी कुछ ऐसे ही मन बना रहा था लेकिन फिर अचानक मुझे ओम प्रकाश जी ने गूगल मीट के माध्यम से ऑनलाइन मीटिंग करने को कहा |

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26 दिसम्बर 2020 का दिन बड़ा अहम् था वेबिनार से पहले ओम प्रकाश जी से मेरी फोन पर कई बार बात हुई उन्होंने किसानों के बहुत सारे संभावित सवाल मुझे नोट कराये ताकि मैं मौके पर फंस ना जाऊं | उनके इस व्यवहार और दूरदर्शी सोच का मैं उसदिन भी कायल था और आज भी कायल हूँ | ओम प्रकाश जी के सहयोग और मार्गदर्शन से 26 दिसम्बर शाम वाली ऑनलाइन मीटिंग बेहद पोजिटिव माहौल में सम्पन्न हुई |

खूब सारी चर्चाएँ हुई और मैं किसानों के लगभग सभी सवालों के जवाब ठीक ठाक तरीके से दे पाया | दो दिन के बाद मेरी ओम प्रकाश जी से दोबारा बात हुई तो उन्होंने बताया कि किसानों में वैचारिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और अब वो ठीक दिशा में सोचने और बात करने लगे हैं |

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20 अप्रैल 2021 का वो दिन भी आया जब मुझे खबर मिली की हकीकत नेचुरल फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी का गठन हो चुका है | ओम प्रकाश जी की दूरदर्शिता और किसान हित में सोचने की वजह से ही यह सब संभव हो पाया कि जैविक किसानों का एक समूह जो संगठित होकर एक बीज से विशाल वटवृक्ष की यात्रा शुरू करेगा |

लेकिन आज 15 मई को यह कैसा दिन तय किया नियति ने जब पूरी टीम को उसका कप्तान छोड़ कर आगे बढ़ गया | ओम प्रकाश जी जैसे व्यक्तित्व अत्यंत विरले हैं जो अपने अध्यन , अनुभव और संसाधनों का उपयोग समाज को ठीक दिशा देने में लगाते हैं | मैं तो ओम प्रकाश जी के अलावा ऐसे किसी दूसरे व्यक्ति से परिचित नहीं हूँ जिसने अपनी रिटायर्ड लाइफ को ऐसे सार्थक किया हो |

लक्ष्मी डेट फ़ार्म वाले विजय गोदारा जी जो हकीकत टीम के जाने माने सदस्य हैं और मुझे ओम प्रकाश जी से रूबरू कराने वाले भी विजय भाई साहब जी थे उनसे जब भी बात हुआ करती थी तो वो बताते थे कि किस तराह ओम प्रकाश जी के स्वभाव और दूरदर्शिता की वजह से हम सभी जुड़े हुए हैं |

दिल से

ओम प्रकाश जी का तकिया कलाम था दिल से उनको सोशल मीडिया में जो कुछ भी कहीं से अच्छा मिल जाता था तो वो उसे अपनी फेसबुक आई डी से दिल से लिख कर शेयर कर दिया करते थे | जहाँ सोशल मीडिया में जातिवाद और क्रान्ति के जंगल उगे पड़े हैं ऐसे में ओम प्रकाश जी एक सुगन्धित वृक्ष थे जहाँ सबके लिए सब अच्छा ही अच्छा था |

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उनकी आखिरी फेसबुक पोस्ट अच्छाई की मार्केटिंग टाइटल से यह बताने के लिए काफी है कि परमात्मा का यह बन्दा क्या और कैसे सोचता था | एक कहावत है ना कि कढाई का एक एक चावल इस बात का गवाह होता है कि भात कैसा बना है | ओम प्रकाश जी का व्यक्तित्व एक खुशबू से लबरेज था जिसका एहसास मुझे आज भी है और ताउम्र रहेगा | उनकी याद हमेशा आएगी |

परमात्मा उन्हे सद्गति और परिवार , मित्रों को उनसे हुआ यह विछोडा सहन करने की ताकत दे | उनके चाहने वाले पूरे भारत में मौजूद हैं | आज सभी का मन भारी है आँखें नम हैं और हरकोई उनसे अपने जुडाव को अपने अपने तरीके से याद कर रहा है |

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