पॉलीहाउस (Polyhouse) के लिए 30 सितंबर तक कर सकते हैं आवेदन

पॉलीहाउस (Polyhouse)  नेट हाउस संरक्षित खेती (Protected Cultivation)

पॉलीघर या पॉलीहाउस (Polyhouse) पॉलीथीन से बना एक ऐसा सुरक्षात्मक घर होता है, जिसमें पौधों के लिए वातावरण को मैनेज किया जा सकता है और उसके अंदर के तापमान, नमी और प्रकाश को जरूरत के अनुसार नियंत्रित एवं परिवर्तित किया जा सकता है। दरअसल आजकल पॉलीहाउस (Polyhouse)  तकनीक के माध्यम से गैर-मौसमी फसलें पैदा की जाती हैं और अधिक उत्पादन के लिए भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। आजकल पॉलीहाउस का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। इसमें मौसम और वातावरण को जरूरत अनुसार मैनेज किया जा सकता है। ड्रिप (Drip irrigation) के माध्यम से सिंचाई करते हैं और पानी की बर्बादी को भी बचाते हैं। ड्रिप सिस्टम में पौधे की जरूरत के अनुसार ही पानी दिया जाता है। पॉली हाउस में विभिन्न प्रकार की खेती की जाती है और कम समय तथा कम स्थान में अधिक से अधिक उत्पादन भी होता है। पॉली हाउस एक सिंगल तथा मल्टी स्पेम ढांचा होता है।  पॉलीहाउस (Polyhouse) कईं प्रकार से बनाए जाते हैं जैसे कि गुफानुमा, झोपड़नुमा, गुंबदकार आदि। इस तरह की खेती को प्रोटेक्टेड क्लटीवेशन भी कहा जाता है, क्योंकि इस तकनीक से वातावरण को नियंत्रित करके फसलों की रक्षा की जाती है। इसीलिए इसे सुरक्षात्मक खेती भी कह सकते हैं। दूसरी तरफ इस खेती में बाहरी कीटों से सुरक्षा के लिए कीट अवरोधी नेट हाउस, ग्रीन हाउस, नई तकनीक से लैस पॉलीहाउस तैयार किए जाते हैं। प्लास्टिक लो-टनल, प्लास्टिक मल्चिंग, प्लास्टिक हाई टनल आदि का इस्तेमाल किया जाता है।

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पॉली / नेट हाउस (Polyhouse)  आवेदकों के लिए सार्वजनिक सूचना

हरियाणा के कृषि विभाग द्वारा जारी की गई सूचना के अनुसार-

सभी पॉली/ नेट हाउस के आवेदकों को सूचित किया जाता है कि जिन आवेदकों ने गत वर्षों में आवेदन किया हुआ है, वे आवेदनकर्ता पूर्ण दस्तावेजों को विभाग के पोर्टल (http://hortnet.gov.in) पर अपलोड करें।

सभी पॉलीहाउस नेट हाउस आदि आवेदन के दस्तावेज अपलोड करने की अंतिम तिथि 30.9.2022 है।

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सभी आवेदनों की वरिष्ठता केवल दस्तावेज अपलोड की अंतिम तिथि तक रखी जाएगी। इस नियत तिथि के बाद वरिष्ठता समाप्त हो जाएगी और ऐसे आवेदन (आवेदनों) को नए सिरे से माना जाएगा।

नोट : यह भी स्पष्ट किया जाता है कि पोर्टल खुला है और कोई भी आवेदक नया आवेदन भी कर सकता हैं।  बागवानी विभाग का पोर्टल लिंक hortnet.gov.in

पॉली/नेट हाउस में आवेदन हेतु दिनांक 30.09.2022तक खुला है। सभी आवदेनों के लिए वरिष्ठता केवल दस्तावेज अपलोड की अंतिम तिथि 30.09.2022तक रखी जायगी इस नियत तिथि के बाद आवेदनों को नए सिरे से माना जायगा

कृषि भारत में सबसे महत्वपूर्ण रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्रों में से एक है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में कुल कृषि श्रमिकों की संख्या 26.31 करोड़ है। जिसमें से 11.88 करोड़  किसान और 14.43 करोड़ खेतिहर मजदूर हैं।

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संरक्षित खेती (Protected Cultivation)

संरक्षित खेती (Protected Cultivation) एक नियंत्रित वातावरण में फसल उगाने की प्रक्रिया है। इस (Protected Cultivation) में तापमान, आर्द्रता, प्रकाश और ऐसे अन्य कारकों को फसल की आवश्यकता के अनुसार नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें (Protected Cultivation) एक स्वस्थ और बड़ी उपज में सहायता मिलती है। (Protected Cultivation) खेती में एक बेहतरीन तकनीक मानी जाती है।

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ड्रिप सिंचाई (Drip irrigation) सिस्टम क्या है

खेतों में पानी की कमी होने पर या पानी की बचत करने के लिए इस ड्रिप सिस्टम (Drip irrigation) का इस्तेमाल किया जाता है। केंद्र और प्रदेश सरकार ड्रिप सिस्टम (Drip irrigation) को बढ़ावा देने के लिए हर साल सब्सिडियां देती हैं। ताकि पानी की बर्बादी को बचाया जा सके। इस सिस्टम (Drip irrigation)से रेतिले क्षेत्रों में भी खेती की जाने लगी है। हालांकि यह तकनीक थोड़ी महंगी होती है परंतु पानी की खपत और पौधों को सही मात्रा में पानी व खुराक देने के लिए खूब इस्तेमाल की जाती है।

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