ग्रीष्म ऋतु की लोकप्रिय हरा चारा फसल-ज्वार (Sorghum) में -धूरिन नामक विषैले पदार्थ से रहे सावधान :-

गर्मी के मौषम में पशुओं को हरे चारे की बहुत ही भयंकर समस्या होती है। इस मौषम मे हरे चारे के विकल्प बहुत कम होते है। इसलिए हरे चारे हेतु हमारे यहां सबसे लोकप्रिय फसल ज्वार (sorghum)  चरी मानी जाती है। पशु भी इसके कोमल हरे चारे को बड़े ही चाव से खाते है। इसलिए किसान व पशुपालक भाई अधिक रकबे मे इसकी बुआई करते है। इसका हरा चारा बहुत ही पौष्टिक होता है, इसमें 8 से 10% तक क्रूड प्रोटीन पाई जाती है।

लेकिन इन सब खूबियों के साथ ही ज्वार फसल के शुरुवाती दिनों में  एक रसायन धूरिन नाम के पदार्थ की मात्रा अधिक होती है। इसके कुछ कारण है जैसे- जब ज्वार की फसल में पानी की कमी होती है अथवा सूखे की स्थिति मे  तो इसमें धूरिन के पाये जाने की सम्भावना अधिक होती है।

इसके साथ ही फसल में अधिक नत्रजन का उपयोग विशेष रूप से फास्फोरस एवं पोटाशियम की कमी में भी धूरिन की मात्रा बढ़ जाती है। इसीलिए गर्मी के मौसम में उगाई जाने वाली ज्वार में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए क्योंकि ज्वार के चारे में धूरिन नामक विषैले पदार्थ की मात्रा विशेषकर गर्मी के मौसम में अधिक हो जाती है।

धूरिन की मात्रा अधिक होने से पशुओ का दम घुटता है

धूरिन एक साइनोजेनिक ग्लूकोसाइड है। जब पशु इसके हरे चारे को खाता है तो, पशु के रुमेन में मौजूद सूक्ष्मजीव इस धूरिन का हाइड्रोलिसिस करके पशु के पेट में हाइड्रोजन साइनाइड  (HCN / Prussic Acid ) नामक जहर उत्पन्न करते हैं। यह साइनाइड जहर कोशिकाओं में मौजूद साइटोक्रोम ऑक्सीडेज नामक एंजाइम को काम करने से रोकता है। जिसके कारण हीमोग्लोबिन से ऑक्सिजन मुक्त नहीं हो पाती और पशु का दम घुटने से पशु की मृत्यु हो जाती है।

यह अभिक्रिया बहुत ही तेज़ी से होती है, जिससे पशु पालक को अपने पशु को बचाने का अवसर नही मिल पाता है।

बारिश होने पर धूरिन का प्रभाव खत्म

ज्वार में धूरिन की मात्रा एक दो बार बारिश होने के बाद अपने आप घटने लगती है। बारिश होने पर धूरिन का प्रभाव खत्म हो जाता है और फिर पशुओं को ज्वार खिलाई जा सकती है। ज्वार फसल में शुरुवाती 40 दिनों तक इसकी मात्रा अधिक होती है। इसीलिए इस अवधि के बाद ही फसल को हरे चारे के रूप में प्रयोग करें। यदि हरे चारे की कटाई इसके पूर्व करना आवश्यक हो तो फसल में कम से कम एक से दो पानी लगाने के बाद कटाई करें तथा हरे चारे को काटकर साफ पानी से धोकर खुली हवा में रखकर 2 से 3 घंटे सुखाने के बाद ही पशुओं को खिलाना चाहिए।

फसल में सिंचाई आवश्यक

इसलिए सभी किसान भाइयों से करबद्ध निवेदन है कि बारिश होने से पहले अपने पशुओं को ज्वार का हरा चारा ना खिलाएं अथवा आपके पास फसल की सिंचाई की व्यवस्था हो तो फसल को एक दो बार सिंचाई के बाद ही हरा चारा काटकर खिलाएं। इस अवस्था में धूरिन की सक्रियता भी कम हो जाती है।

“सादर सविनय निवेदन” :- आप सभी सम्मानित किसान भाइयो व बहनों से करबद्ध निवेदन है कि अधिक जानकारी के लिए आप मुझे प्रतिदिन शाम 7:00 से रात्रि 10:00 बजे के मध्य दूरभाष पर संपर्क कर सकते है। यदि आप फार्म विजिट करना चाहते है तो केवल रविवार के दिन सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 के मध्य फार्म पर आ सकते है

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