पराली से बिजली बनाने के लिए उद्योगों को मिले ढाई करोड़

पराली सहित अन्य फसल अवशेषों के प्रबंधन से बिजली बनाने के लिए प्लांट लगाने वाले सभी छोटे-बड़े उद्योगों को ढाई करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। खेतो में पराली ना जलाने से पर्यावरण स्वच्छ रहेगा और लोगों को आजीविका कमाने का मौका भी मिला।

ऊर्जा प्लांट लगाने के लाभ
उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस नीति पर मुहर लगाई। जैव ऊर्जा प्लांट लगाने वाले उद्योग पांच साल तक इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। यदि किसी कंपनी ने पूर्व में कोई प्लांट लगा लिया है तो वह भी योजना का लाभ पाने का हकदार होगा। खेतों में पराली व नाड़ (ठूंठ) न जलने से पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद मिल रही है। साथ ही करीब 2200 लोगों को आजीविका कमाने का मौका भी मिला है।

जैव ऊर्जा प्लांट लगाने की रणनीति और मदद
जैव ऊर्जा प्लांट को प्रति मेगावाट 25 प्रतिशत की पूंजीगत सब्सिडी (एक करोड़ रुपये प्रति मेगावाट) दी जाएगी। कृषि आधारित खाद्य प्रसंस्करण और संबद्ध उद्योग भी योजना के पात्र होंगे। कुछ दिनों के अंदर संबंधित उद्योगो को अनुदान राशि जारी कर दी जाएगी। हर साल पराली से उठने वाले धुएं को लेकर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच राजनीति गर्माती रही है। नई योजना से पराली प्रबंधन में काफी मदद मिलेगी। हरियाणा में हर साल करीब 34.35 लाख एकड़ में धान बोई जाती है। कुल 70 लाख टन फसल अवशेष होते हैं जिसमें से बासमती की 34 लाख टन पराली का इस्तेमाल पशु चारे के रूप में किया जाता है। बाकी बची 36 लाख टन पराली का इस्तेमाल उद्योगों में जैव ऊर्जा सहित अन्य कार्यों में करने की रणनीति बनाई गई है।

पराली जालना हुआ कम
एक साल के अंतराल में पराली जलाने की घटनाओं में 48 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2021 में जहां 6987 स्थानों पर किसानों ने पराली जलाई थी, वहीं 2022 में 3661 स्थानों पर पराली जलाने के मामले सामने आए। इस तरह 3326 जगह कम पराली जली।

प्रबंधन के लिए उठाए गए कदम
किसानों को फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए मशीन खरीदने पर 50 से 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। पिछले पांच साल में 79 हजार 477 मशीनों की खरीद के लिए किसानों को 666 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

पराली के इन सीटू-एक्स सीटू प्रबंधन के लिए किसानों को 1000 रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

आइओसीएल के 2जी इथेनाल संयंत्र में पराली पहुंचाने के लिए किसानों को दी जाने वाली सहायता राशि 500 से बढ़ाकर 1000 रुपये प्रति टन किया।

औद्योगिक इकाइयों के आसपास बायोमास उत्पन्न करने वाले गांवों का कलस्टर बनाया जा रहा है। इससे पराली निस्तारण में मदद मिलेगी।

पराली के भंडारण के लिए पंचायत भूमि उपलब्ध कराई जाती है।