लौकी की खेती के लिए जैविक विधि अपनाऐ

लौकी कद्दूवर्गीय कुल की बहुत ही महत्वपूर्ण सब्जी है। यह विश्व भर में पाई जाती है। इस मुलायम फल में नमी, प्रोटीन, वसा, विटामिन बी, विटामिन सी और अन्य खनिज तत्व पाए जाते हैं।

लौकी फल की आकृति

लोकी के फलों की आकृति दो प्रकार होती है-लम्बी और गोल

आमतौर पर लम्बी तथा पतली लोकी उगने का प्रचलन अधिक है। लोकी की कुछ प्रमुख उन्नत किस्में इस प्रकार है,

लम्बी किस्में, गोल किस्में, नवीनतम किस्में आदि है

खेत की तैयारी

खेत की तैयारी के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से एवं बाद में 2 से 3 जुताइयां देसी हल या कल्टीवेटर से करते हैं। हर जुताई के बाद खेत में पाटा चलाकर मिट्टी को भुरभुरी व समतल कर लेना चाहिए ताकि खेत में सिंचाई करते समय पानी बहुत कम या ज्यादा न लगे तथा पानी की निकासी का समुचित प्रबंधन करें।

बीज की मात्रा

ग्रीष्मकालीन – ग्रीष्मकालीन फसल के लिए 4 से 6 किलोग्राम बीज प्रति हैक्टर उपयुक्त माना जाता है।

वर्षाकालीन- वर्षाकालीन फसल के लिए 3 से 4 किलोग्राम बीज प्रति हैक्टर उपयुक्त माना जाता है।

बुआई का समय – ग्रीष्मकालीन फसल के लिए जनवरी से मार्च उपयुक्त है।

जैविक खाद

(लौकी की फसल से अधिक पैदावार लेने के लिए उसमें कम्पोस्ट खाद या गोवर खाद का होना बहुत जरूरी है। इसके लिए एक ट्रैक्टर भूमि में लगभग 25 से 30 टन  गोवर की अच्छे तरीके से सड़ी हुई खाद तथा 50 किलोग्राम नीम की खली और 30 ग्राम अरंडी की खली देनी चाहिए। इन सब खादों को अच्छी तरह मिलाकर मिश्रण तैयार कर खेत में बुआई के पहले समान मात्रा में बिखेर दें तथा फिर अच्छी तरह से खेत की जुताई कर खेत को तैयार करें। इसके बाद बुआई करें जब फसल 20 से 25 दिन की हो जाए तब उसमें नीम का काढ़ा तथा गौमूत्र का मिश्रण तैयार कर खड़ी फसल पर हर 10 से 15 दिन के अंतर पर छिड्काव करे)

सिंचाई प्रबंधन

गर्मी में लौकी की खेती के लिए प्रत्येक सप्ताह सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन बरसात में सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती। बरसात न होने पर तथा ग्रीष्मकालीन फसल के लिए 8 से 10 दिन के अंतर पर सिंचाई करें।

कीट एवं रोकथाम

लोकी में कई परकार के कीट भी पाए जाते हैं जेसे –

सफेद ग्रब, लालड़ी कीट, मृदु रोमिल फफूंदी, मोजैक और चुरनी फफूंदी पाई जाती है 

रोकथाम- इसकी रोकथाम के लिए खेत में नीम की खाद प्रयोग करें और फसल में प्रकोप दिखाई देने पर नीम आधारित कीटनाशक का छिड़काव करें।

फलों की तुड़ाई

लौकी के फलों की तुड़ाई मुलायम अवस्था में करनी चाहिए। फलों का वजन किस्मों पर निर्भर करता है। फलों की तुड़ाई डंठल लगी अवस्था में किसी तेज चाकू से करनी चाहिए। यदि तुड़ाई 4 से 5 दिनों के अंतराल पर करते रहेंगे तो पौधों पर ज्यादा फल लगेंगे।

उपज

वैज्ञानिक तकनीकियों को अपनाते हुये लौकी की खेती की जाये तो 100-150 क्विंटल प्रति हैक्टर उत्पादन आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।