बलवान प्याज के आविष्कारक बलवान सिंह लाम्बा से मुलाकात

परिचय

हरियाणा के भिवानी जिले की तहसील बवानी खेडा के गाँव अलखपुरा में रहने वाले स्टार आविष्कारक बलवान सिंह जिन्होंने अपने आविष्कार बलवान मिर्च और बलवान प्याज के मार्फत हज़ारों किसानों के जीवन को आसान किया है। बलवान सिंह जी बताते हैं कि उनका जन्म 5 फ़रवरी 1960 को किसान फ़तेह सिंह लाम्बा जी के यहाँ हुआ था और हमारा सम्बन्ध हरियाणा के प्रसिद्द सेठ छाजू राम लाम्बा जी के कुनबे से है । पहले हम गाँव में ही रहते थे लेकिन बाद में हमारे पिताजी किसान फतेह सिंह लाम्बा जी ने खेत दूर होने के कारण गाँव से निकल कर खेतों में ही घर बना लिया और मेरा बचपन इसी खेत वाले घर में ही गुजरा।

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शिक्षा और रोजगार

बलवान सिंह बताते हैं कि उन्होंने अपनी प्राइमरी स्कूल की शिक्षा नज़दीक के गाँव जीताखेडी के सरकारी स्कूल से प्राप्त की और मेट्रिक की परीक्षा बवानीखेडा के सरकारी स्कूल से पास की। जल्द ही मुझे जिंदल स्टील्स कम्पनी में नौकरी मिल गयी लेकिन मेरा मन नही लगा और मैं आर्मी में भर्ती होने के लिए प्रयास करने लगा और जल्द ही प्रयास रंग लाये और मैं आर्मी में ट्रेनिंग के लिए चला गया । कुछ महीनों की ट्रेनिंग के बाद मेरा मन वहां भी नही लगा और मैं वहां से त्यागपत्र देकर वापिस अपने गाँव चला आया और अपने खेतों में काम करने का निश्चय करके मैंने किसान बन कर जीवन जीना शुरू किया। मेरा विवाह रोहतक जिले के बलम्बा गाँव की संतरा देवी के साथ हुआ और उसने मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर मेरा साथ देना शुरू किया ।

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किसानी और नवाचार

साल 1984 से शुरू हुआ किसानी का यह जीवन मुझे बहुत रास आ रहा था और मेरा मन खेतों में बहुत लगता था। मेरे पास बस एक एकड़ जमीन ही थी जिसपर मैं मेरा परिवार और कुछ मजदूरों के परिवार निर्भर थे । मैंने सब्जियों की खेती करने का निर्णय लिया क्यूंकि इसमें मुझे साल भर काम करने स्कोप नज़र आ रहा था। मुझे यदि किसी पारिवारिक या निजी काम से बहार आना जाना पड़ता था तो मेरी पत्नी संतरा देवी खेत के पूरे काम को संभाल लेती थी और मजदूरों से काम करवा लिया करती थी।

बलवान प्याज की खोज कैसे हुई ?

खेतों में काम करते हुए मैंने महसूस किया कि हरेक पौधा अपने आप में विशेष होता है और पौधे अपनी नस्ल में सुधार करते रहते हैं और बीच बीच में अच्छी नस्ल के पौधे भी विकसित होते रहते हैं और हम ज्यादा उत्पादन के लालच में उन्हें पहचान नही पाते हैं और उन्हें सब्जी के तौर पर बेच देते हैं। मैं अपने खाली समय में खेत में घूम घूम कर एक एक पौधे का निरीक्षण किया करता था और उनके गुणों जैसे लम्बाई, क्वालिटी , रोग प्रतिरोधक क्षमता, उम्र , फल देने की कैपेसिटी आदि का रिकार्ड बनाया करता था। मुझे कुदरत के काम को देखने में बहुत मजा आने लगा। एक दिन मैंने देखा जो प्याज का बीज मैं पडोस के गाँव से लेकर आया था उसमें गहरे लाल रंग का प्याज जमा है जो देखनें में भी सुंदर है और उसकी क्वालिटी भी बहुत अच्छी है। मैंने इसके बीज को बढाने की नीयत से उसे उगाया और धीरे धीरे सिलेक्शन विधि से अच्छी नस्ल को अलग कर लिया। इस काम में कब सत्रह साल बीत गये मुझे पता ही नही चला।

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नकली बलवानों से सामना

मेरे प्याज की ख्याति आस पास के गाँवों से निकल कर दूर तक चली गयी थी और मेरे नाम से प्याज के बीज बिकने लगे कुछ समय के पश्चात मुझे पता चला कि अनेकों नकली बलवान मार्किट में पैदा हो गये हैं जो मेरे नाम से बीज बेचते और पैसा कमाते। किसी किसान का नुक्सान हो जाता वो उसे मेरे पास भेज देते। मैं इन नकली बलवानों से तंग आकर इतना परेशान हो गया कि मैंने सिर्फ अपने प्याजों की नस्ल बचाने का काम किया और अन्य किसानों से सम्पर्क तोड़ दिया।

हनी बी नेटवर्क से मुलाकात और बड़ा बदलाव

साल 2008 में हनी बी नेटवर्क से मनोज कुमार और नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन से महेंद्र सिंह मदेरणा मेरे खेत पर मुझे ढूंढते हुए आये और मुझे हनी बी नेटवर्क के अभियान के बारे में बताया और मेरे से मेरी खोज के बारे में जानकारी लेनी चाही। मुझे तो उस समय कोई विश्वास नही हुआ लेकिन मेरी पत्नी संतरा देवी ने सारी बातें उन्हें खोल कर बतायी और वे कुछ जरूरी फोटो और जानकारियां नोट करके चले गये।

उस दिन को याद करते हुए महेंद्र सिंह मदेरणा बताते हैं कि बलवान सिंह जी बड़ी मशक्कत के बाद जब हमें मिले तो वो हमें देख कर क्रोधित और कुपित हो गए थे और बोले कि आ गये नए ठग, हमने जो भी बात की वो उनकी पत्नी से और खेत मे काम कर रहे मजदूरों से की। बलवान सिंह जी पूरी मीटिंग में हमारी तरफ पीठ करके ही बैठे रहे। लेकिन हमारे पास इन्नोवेटर्स के मूड सविंग्स को झेलने का लंबा अनुभव था सो हम साड़ी जानकारी लेकर और बेशर्म होकर चाय पी कर ही उठे।

बलवान सिंह आगे बताते हैं कि कुछ समय के बाद मुझे नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन से पत्र मिला कि वे उनकी खोजों का परीक्षण हरियाणा कृषि विश्वविधालय से करवाना चाहते हैं और फिर मुझे विश्वास हुआ कि अब सही दिशा में बात चल पड़ी है। हरियाणा कृषि विश्वविधालय ने मेरी किस्म बलवान प्याज का परीक्षण किया जिसकी पैदावार 500 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त हुई जो विश्वविधालय द्वारा विकसित किस्म हिसार -2 से अधिक थी।

बलवान प्याज के गुण

बलवान प्याज का भंडारण बेहद आसान है इसे बिना किसी कोल्ड स्टोरेज और किसी भी प्रकार के रसायन से ट्रीट किये कमरे के तापमान पर स्टोर किया जा सकता है। इसकी उपज 500 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है जबकि सामान्य किस्में 200 क्विंटल प्रति हेक्टयेर तक बड़ी मुश्किल से उत्पादन देती हैं। इसका छिलका पतला होता है और गूदा मोटा होता है। चायनीज फ़ूड बनाने वालों को प्याज की यह किस्म बहुत पसंद आती है। एक एक प्याज का वजन 150 ग्राम से 500 ग्राम के बीच होता है। इसके बीजों का अंकुरण भी बेहद शानदार होता है।

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मान सम्मान

हनी बी नेटवर्क और नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने मुझे राष्ट्रपति सम्मान के लिए दिल्ली बुलवाया और मुझे तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटील जी ने साल 2012 में पुरूस्कार से सम्मानित किया। मुझे नेशनल बायो डाइवर्सिटी बोर्ड के द्वारा भी पांच लाख रुपये की राशि बतौर इनाम दी गयी। साल 2017 में मुझे मौलाना आजाद विश्वविधालय जोधपुर राजस्थान के द्वारा खेतों के वैज्ञानिक सम्मान की प्राप्ति हुई।

किस्मों का पंजीकरण

राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित बलवान आज PPVFRA (Protection of Plant Varieties and Farmers’ Rights Authority), भारत सरकार से अपनी वैरायटीज के पंजीकरण के इंतज़ार में बैठे हैं। पजीकरण के बाद किसान बलवान सिंह सिंह अपने आविष्कार को रोजगार में बदलने के इच्छुक हैं और बड़े स्तर पर प्याज के बीज का उत्पदान करके किसनों को उपलब्ध कराना चाहते हैं।

बलवान सिंह का व्यक्तित्व

डेढ़ एकड़ के किसान बलवान सिंह ने अपने परिवार के साथ साथ दस मजदूरों के परिवार भी चला दिए है। रिकार्ड को कैसे मेंटेन किया जाता है उसके लिए बलवान सिंह से बेहतर कोई नही सिखा सकता है। आप साल बोलो और पूछो किस किसान को कितना बीज दिया था और उसके खेत मे बीज ने कैसा परफॉर्म किया था। सेकंडों के हिसाब से बलवान सिंह अपने झोले में से कागज निकाल कर पढने लगते हैं।

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बलवान सिंह खाली पर्चों, वेस्ट कागजों को जोड़ कर कापियां बना लेते हैं और बड़ी साफ सुंदर लिखाई में पूरा रिकार्ड बना डालते हैं। सुबह चार बजे उठ कर शॉर्ट वेव पर आल इंडिया रेडियो की सर्विस के साथ इनकी दिनचर्या शुरू हो जाती है। बलवान सिंह आज एक कामयाब एंटरप्रेन्योर हैं जिनसे सीखने के लिए हज़ारों बातें हैं। कम पढ़ा लिखा व्यक्ति जब खुद को व्यवस्थित करके अपना जीवन अनुशासन से जीता है तो वो बलवान सिंह बन सकता है। बलवान सिंह के बेहतरीन मेहमान नवाज भी हैं। आपने पास आये गए की सेवा और मान सम्मान करते हैं।

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प्याज के बीज का भाव

बलवान प्याज के बीज का भाव 5000 रुपये प्रति किलो है। इच्छुक किसान नीचे दिए गये मोबाइल नम्बर पर बलवान सिंह जी से सम्पर्क कर सकते हैं। मेरा यह निजी अनुभव है कि बलवान सिंह जी किसानों को कुछ ना कुछ डिस्काउंट या अधिक बीज देकर उन्हें संतुष्ट रखते हैं और पूरे सीजन मोबाइल से उनके सम्पर्क में रहते हैं और उन्हें पूरा गाइड करते हैं। सिर्फ बीज ही सबकुछ नही होता है खेत से पूरा उत्पादन लेने के लिए बलवान सिंह किसान को पूरा गाइड करते हैं ताकि उसका मनोबल बना रहे है और किसान की मेहनत सफल हो और उसे भरपूर उत्पादन मिले।

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सम्पर्क सूत्र

बलवान सिंह लाम्बा सुपुत्र श्री फ़तेह सिंह लाम्बा,

लाम्बा फ़ार्म हाउस (हांसी -भिवानी वाया बवानी खेडा रोड, सुंदर नेहर पुल के पास) गाँव अलखपुरा , डाक सिवाना (वाया मुंढाल खुर्द) तहसील बवानी खेडा जिला भिवानी हरियाणा,भारत पिनकॉड 127104 मोबाइल नम्बर 9992696963

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